गेहूं की फसल, किसान Vs कोरोना

कोरोना जैसे वैश्विक महामारी से निपटने के लिए भारत सरकार ने जो अभूतपूर्व पहल की है वह बेहद प्रशंसनीय है। इसकी रोकथाम के लिए आपकी ओर से किये जा रहे प्रयासों की हम भूरि भूरि प्रशंसा कर रहे हैं। साथ ही आपका ध्यान कुछ विशेष विषयों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। कोरोना से निपटने के लिए जारी लॉकडाउन में फिलहाल देश के पास पर्याप्त अन्न भंडार है। यह भंडार आगे भी भरा रहे इस पर विचार आवश्यक है। दरअसल, गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार है लेकिन यह कैसे हो सबसे बड़ी चिंता की वजह यही है। गेहूं की कटाई के दौरान किसान महामारी से बचें। इसके लिए हम आपको कुछ सुझाव देना चाह रहे हैं।




1. गेहूं की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से या हाथ से होती है। हाथ से कटाई करने पर पशुओं के लिए भूसा प्राप्त हो जाता है। हालांकि भूसा इकट्ठा करते वक्त सांस की बीमारी का खतरा होता है और कोरोना के प्रकोप में यह बेहद खतरनाक स्थिति है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि किसानों को कंबाइन हार्वेस्टर से कटवाने पर 100 रुपये क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि देने का निर्देश दें।


2. अगले एक साल के लिए दूध पर 5 रुपये लीटर दिया जाये जिससे चारे की व्यवस्था कर पायें क्योंकि दूध की बिक्री से अधिकतर ग्रामीणों की जीविका चलती है। लॉकडाउन में मिठाई दुकानें, चाय दुकान व ढाबे बंद होने के कारण दूध के भाव गिर गये हैं जबकि चारे के भाव बढ़ गये हैं ऐसे में यह प्रोत्साहन राशि जरूरी है।


3. कंबाइन हार्वेस्टर में आई खराबी दूर हो सके इसके लिए प्रत्येक ब्लाक में स्पेयर पार्ट्स, मिस्त्री व पंचर आदि बनाने की एक दो दुकानें खोलने की व्यवस्था हो।


4. सरकारी गेहूं खरीद केंद्र किसानों की फसल खेत या गांव से खरीदें। यानी कि किसान सेंटर पर नहीं जाएंगे बल्कि सेंटर खुद किसान तक पहुंचे।


5. किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर कोई व्यापारी कम रेट पर सौदा न करे। इसके लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये क्विंटल तय हो। इससे कम में खरीददारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हो। एमएसपी रेट पर गेहूं खरीद होने से किसी को कोई घाटा नहीं होगा और किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सकेगा।


6. भारतीय कृषि पद्धत्ति यानी जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाये। इसे अगर समग्र रूप से आत्मसात किया जाये तो न केवल किसानों की समस्याएं दूर होगी बल्कि प्रदूषण मुक्त जीवन शैली के लिए संघर्ष का भी अंत हो जायेगा।


7. जैविक कृषि व कृषि उत्पाद के सुचारु रूप से विपणन क्षेत्र विकषित किये जाने की आवश्यकता है। सरकार की ओर से क्रय की जाने वाली खाद्य पदार्थों में जैविक उत्पादों को अतिरिक्त मूल्य के साथ प्राथमिकता दिया जाए।


8. किसानों द्वारा कृषि कार्य हेतु क्रय किये गए सभी वस्तुओं पर जीएसटी के भुगतान को किसानों को डीबीटी के जरिए लौटाने की व्यवस्था हो क्योंकि किसान द्वारा उत्पादित कृषि उत्पाद पर मंडी टैक्स के रूप में एक और कर का भुगतान करना पड़ता है जो भारतीय कर व्यवस्था के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।


9. ऐसे जैविक किसान समूह व जैविक उत्पादक कंपनियां जो जैविक उत्पाद का निर्यात करती हों उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाये। साथ ही देश की सभी मंडियों में कुछ स्थान जैविक उत्पादों के लिए आरक्षित किया जाए।


10. जिस तरह उद्योगपतियों को उद्योग स्थापित करने के क्रम में क्रय किये गए सभी कैपिटल गुड्स, रॉ मटेरियल, पैकिजिंग मटेरियल व सर्विस पर जीएसटी के रूप में भुगतान की गई राशि को उसका क्रेडिट लेकर अपनी फाइनल प्रोडक्ट पर लागू होने वाले जीएसटी के साथ समायोजित करने की छूट है उसी तरह की छूट किसानों को भी मिलनी चाहिए ताकि उन्हें मंडी टैक्स से राहत मिले।


11. एक तरफ गन्ने के भुगतान के लिए किसान मारा मारा फिर रहा है वहीं कुछ स्थानों पर कोर्ट के निर्णय को धता बताते हुए सट्टे वाले गन्ने की पेराई किये बिना मिलें बंद हो गई हैं। 1996 में कोर्ट के आदेश के बाद बंद हो चुकी मिलों में अगस्त तक गन्ने की पेराई की गई थी।


12. गन्ने की बुवाई का समय निकल रहा है। इसी महीने में बुवाई होनी चाहिए। इसलिए आपसे निवेदन है कि इस महामारी को देखते हुए निर्धारित सट्टे की पेराई के साथ साथ अतिरिक्त सट्टे बनाने का निर्देश दें जिससे किसान का खेत खाली हो पाये और वो आगे बुवाई कर पाये।


13. गांवों से मंडी न पहुंच पाने के कारण सब्जियां सड़ रही हैं जिससे किसानों की मेहनत तो बर्बाद हो ही रही है उन्हें भयंकर आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। दूसरी तरफ शहरों में सब्जियों के दाम चार गुना बढ़ गये हैं। ऐसे में किसानों के खेतों से सब्जी खरीद की सरकारी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे शहर और गांव दोनों का भला हो।


14. किसान स्वस्थ तो देश स्वस्थ के मूल मंत्र को साकार करते हुए समाज के उन वर्गों के हित का भी ख्याल रखना जरूरी है जिनके काम धंधे बंद होने के कारण उनके आय का साधन बंद हो गया है। इसमें असंगठित क्षेत्रों के लोग हैं जिनका कहीं भी कोई रिकार्ड नहीं है।


15. कृषि की उच्चतर शिक्षा के लिए एक किसान विश्वविद्यालय की स्थापना हो। ताकि यहां से शिक्षित होकर निकलने वाले युवा वैज्ञानिक दृष्टि से खेती को और अधिक उन्नत बना सकें। इससे रोजगार के लिए शहरों की तरफ भागने की गति पर रोक लगेगी।


16. जिनका वास्तव में खेती किसानी से नाता है यानी जो वास्तविक किसान हैं उनके लिए राज्यसभा की कम से कम दस प्रतिशत सीटें रिजर्व की जाय। ताकि धरातल से जुड़े ये वास्तविक किसान उच्च सदन में किसानों की समस्याओं को स्वर दे सकें।


17. 20 साल पहले नौकरी शुरू करने वाले या बिजनेस करने वालों की आर्थिक हैसियत पिछले बीस सालों में लाखों-करोड़ों तक पहुंच गई है जबकि किसान जहां था आज भी वहीं है। इस आर्थिक विषमता को दूर करने के लिए फुलप्रुफ प्लान बने। ताकि युवाओं का खेती के प्रति झुकाव हो।


18. खेती करने वालों युवाओं को प्रोत्साहन राशि के तौर पर एक निश्चित राशि हर महीने प्रदान की जाये। इससे गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन पर रोक लगेगी।


19. कोरोना वॉरियर्स के रूप में सेवा देने वाले पत्रकारों में से कुछेक को छोड़कर अधिकतर की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। इनमें प्रिंट मीडिया से लेकर यू ट्यूब, वेबसाइट व अन्य माध्यमों के पत्रकार हैं। इन्हें भी आर्थिक मदद की जरूरत है।


20. ट्यूशन पढ़ाकर व सड़कों पर ठेला रिक्शा चलाकर या फिर छोटी छोटी गुमटियों व खोमचों के जरिए अपने परिवार का भरण पोषण करने वालों की कमाई का जरिया बंद होने से उनके सामने भुखमरी का संकट है।


21. लॉकडाउन की वजह से किसी तरह भोजन का प्रबंध कर लेने वालों की परेशानियां भी कम नहीं हैं। इनमें से अधिकतर किराये के मकानों में रहते हैं ऐसे में उन्हें मकान मालिकों से किराये में छूट दिलाकर उनकी सहायता की जा सकती है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देशित करें।


अंत में इन गंभीर परिस्थितियों में अगर आपको उपर्युक्त या किसी अन्य मुद्दे पर हमारी आवश्यकता पड़े तो हम एवं हमारा संगठन हर प्रकार के सहयोग के लिए सदैव तैयार है।


धन्यवाद

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